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अगस्त, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

म्हारा हरियाणा म्हारे शहर

1.हरियाणा का पेरिस।            करनाल 2.पेपर सिटी।                        यमुनानगर 3.शुगर सिटी                        पलवल रोहतक 4.पेट्रोकेमिकल हब                पानीपत 5.नैनोसिटी।                        रायपुर(पंचकुला 6.इलेक्ट्रॉनिक सिटी                   गुरुग्राम 7.मनोरंजन सिटी                       गुरुग्राम 8.सिटी ऑफ कॉटन।                 पलवल 9.शहीदों का शहर                     झज्जर 10.धर्मार्थ न्यासों का शहर।        भिवानी 11.नदीयो/नहरों का शहर।         टोहाना 12.सिटी ऑफ वॉर हीरोज ...

15 दरवाजों वाला शहर था पानीपत, हर दरवाजे का है अपना किस्सा

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- आज भी सालारजंग गेट दे रहा पानीपत के इतिहास की गवाही - जमींदोज हो चुका किला, ऊंची जगह पर बना है पार्क जितेंद्र बूरा. तीन लड़ाइयों से विख्यात पानीपत आज उधोग क्रांति में अपनी पहचान रखता है। एक अनोखी पहचान भी पानीपत की थी जिसकी अब धरातल पर निशानी कम, बुजुर्गों के दिलों में यादें ही बची हैं। एक दौर में पानीपत 15 दरवाजों के अंदर बसा शहर था। हर दरवाजे का एक नाम और किस्सा है। इतिहास की गवाही देता सालारजंग गेट ही अब बचा है। सुरक्षित नहीं किया गया तो यह निशानी भी वक्त के थपेड़ों में ओझल हो जाएगी। पानीपत के मशहूर शायर अल्ताफ हुसैन हाली पर लिखी पुस्तक दास्तान-ए-हाली में लेखक रमेशचंद्र पुहाल ने भी इन दरवाजों का जिक्र किया है।  पानीपत का परिचय अन्य लेखकों की राय से प्रो. नजीर अहमद साहब अपनी लिखी किताब - अल्ताफ हुसैन हाली तहीककी और तनकीदी जायजे, में इस प्रकार लिखते हैं। बादशाह ग्यासूद्दीन बलबन के शासन में पानीपत को महत्व प्राप्त हुआ। अपने शासक होने की घोषणा के बाद सुल्तान बलबन ने देहली के चारों ओर मजबूत किले और थानों के निर्माण कराए। ताकि मंगोलिया से आए हुए हमलावरों और लुटेरों से शहर देहल...

लगान नहीं देने पर यहां 22 लोगों पर चलाया था कोल्हू, आज भी पार्क में इतिहास की गवाही दे रहा कोल्हू का पत्थर

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- 1857 में अंग्रेजों ने लगान मांगा तो लिवासपुर के उदमीराम ने की थी तीन अंग्रेज अफसरों की हत्या - अंग्रेजों ने उदमीराम व उसकी पत्नी को को 22 दिन तड़पाकर मारा था और उसके साथियों को कोल्हू से कुचल दिया था - जीटी रोड स्थित देवीलाल पार्क में रखा हुआ है खूनी कोल्हू व उदमीराम का इतिहास का शिलापट्‌ट जितेंद्र बूरा . सोनीपत वर्ष 1857 में सोनीपत जिले में अंग्रेजी हुकूमत का ऐसा विरोध हुआ कि 22 लोगों को बड़े पत्थर के कोल्हू के नीचे पिसवा दिया गया। आजादी की उठी इस चिंगारी के दर्दनाक इतिहास का गवाह वह खूनी कोहलू का पत्थर देवीलाल पार्क में खड़ा गवाही दे रहा है। अंग्रेजों ने जब लगान मांगा तो लिवासपुर के चौधरी उदमीराम नंबरदार ने सबसे पहले इसका विरोध किया। उदमीराम ने लगान  देने से इंकार किया तो लगान वसूलने के लिए तीन अंग्रेज अफसर बहालगढ़ पहुंचे थे। उदमी नंबरदार ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों की हत्या कर दी थी। अंग्रेजों ने उदमी राम व उसके साथियों की हत्या कर इस गांव को उजाड़ दिया था। आज भी देश में लिवासपुर को शहीद चौधरी उदमीराम नंबरदार के गांव के रूप में जाना जाता है। हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस...

पानीपत में है पौने तीन ग्राम की प्राचीन कुरान

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- पानीपत में कलंदर बाजार के राजकुमार सहगल 2.80 ग्राम की कुरानशरीफ को सालों से सहेजकर रखे हैं -  एतिहासिक कलंदर दरगाह पर अरब से आए एक शेख ने उपहार स्वरूप दी थी छोटी कुरान - चीन में बताई गई है सबसे छोटी कुरान जितेंद्र बूरा. समय तो नहीं रुकेगा, लेकिन वर्तमान की खास धरोहरों को अगर सहेजकर रखेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए वे इतिहास की मिसाल बनेंगी। तीन बड़ी लड़ाई के गवाह पानीपत में सालों से एक ऐसी छोटी सी धरोहर को सहेजकर रखा गया है जोकि अब आकर्षण का केंद्र बनी है। कलंदर बाजार के राजकुमार सहगल के पास 2.80 ग्राम की कुरानशरीफ बड़ी अदब के साथ रखी है। दावा है कि दुनिया की सबसे छोटी कुरानों में एक यह भी है। कुछ साल पहले लाक, अल्बानिया में 5.2 ग्राम की कुरान होने की बात सामने आई थी, लेकिन यह उससे भी कम वजन की कुरान है। कलंदर बाजार के राजकुमार सहगल ने बताया कि उनकी दुकान पर करीब 1980 के आसपास अरब से एक शेख यहां ऐतिहासिक कलंदर शाह दरगाह में मत्था टेकने के लिए आया था। उसके पास ऐसी ही दो कुरान थी। शेख ने उनकी ज्वैलरी की दुकान से एक को चांदी के लोकेट में ढलवा लिया तथा दूसरी को उसने दुकान प...

मोदी सरकार के तीन अकल्पनीय फैसले, देश में रचा अपना ही इतिहास

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- 8 नवंबर 2016 की शाम को टीवी स्क्रीन पर लाइव आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 व 1000 के नोट बंद कर नकली नोट व ब्लैकमनी के खिलाफ कदम उठाया। - 1 जुलाई 2017 की तारीख में आधी रात 12 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में बटन दबाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी लांच कर आर्थिक सुधार का फैसला लिया। - 5 अगस्त 2019 को आजादी के 72 साल बाद अनुच्छेद 370 को रद्द कर कश्मीर को दोहरे संविधान और कानूनों से आजादी दिला दी। जितेंद्र बूरा. भारत  की जनता ने अपनी वोट की ताकत से मजबूत और प्रचंड बहुमत वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की   वर्ष 2014 और 2019 मेंं लगातार दो बार सरकार बना राष्ट्र में बड़े बदलाव का सपना देखा। देश की अखंडता, आर्थिक सुधार और काला धन पर जबरदस्त प्रहार करते हुए तीन बड़े फैसले इस सरकार ने लेकर आने वाली पीढ़ियों के लिए नया इतिहास रच दिया। 8 नवंबर 2016 की शाम को टीवी स्क्रीन पर लाइव आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 व 1000 के नोट बंद कर नकली नोट व ब्लैकमनी के खिलाफ कदम उठाया। 1 जुलाई 2017 की तारीख में आधी रात 12 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में बटन दबाकर प्रधानमंत...

गुरु तेग बहादुर के शीश की रक्षा के लिए बढ़खालसा के दादा खुशहाल सिंह दहिया ने दी थी अपने शीश की कुर्बानी

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गुरु तेग बहादुर के शीश की रक्षा के लिए बढ़खालसा के दादा खुशहाल सिंह दहिया ने दी थी अपने शीश की कुर्बानी - गुरु तेग बहादुर को समर्पित है सोनीपत के बढख़ालसा गांव का स्मारक - बढ़खालसा स्मारक के म्यूजियम में  महाबलिदानी दादा खुशहाल सिंह दहिया की लगी है प्रतिमा जितेंद्र बूरा. सोनीपत सोनीपत जिले का बढ़खालसा गांव इतिहास के पन्नों में सदा के लिए बलिदान की धरती के तौर पर नाम दर्जा करवा चुका है। धर्म की रक्षा में बलिदानी देने वाले गुरु तेगबहादुर सिंह के शीश की रक्षा के लिए यहां महाबलिदानी दादा खुशहाल सिंह दहिया  ने अपने शीश की कुर्बानी दे दी। गांव में बना स्मारक और म्यूजियम उस बलिदानी का गवाह बना है। अब यहां दादा खुशहाल सिंह दहिया की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई है। हर दिन विभिन्न परिवार यहां अपने बच्चों को इस गौरव गाथा को सुनाते हुए इस स्थल को देखने पहुंच रहे हैं। सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर ने जब मुगलों के सामने झुकने से मना कर दिया तो उन्होंने उसे तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। उन्होने कश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। वर्ष 1675 को इस्लाम...