संदेश

जाटों का इतिहास लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जाट योद्धाओं का इतिहास : देश के स्वाभिमान पर दी बलिदानियां, 13 अप्रैल को मनता है विश्व जाट दिवस

चित्र
- आठ फिरंगी नाै गौरे, लड़े जाट के दो छौरे। - जाट मरा तब जाणिए, जब तेरहवीं हो जाए। - कविता सोहे भाट की, खेती सोहे जाट की। जितेंद्र बूरा. हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन। जाट इन सब धर्मों में है। आस्थावान हैं पर कट्‌टरवादी नहीं। हक और स्वाभिमान के लिए लड़ते रहे हैं, इसका इतिहास गवाह है। मुगल हो या अंग्रेजों से स्वतंत्रता संग्राम, कौम के वीरों ने लड़ते हुए बलिदानियां दी। पर इतिहास के पन्नों में खास तवज्जो नहीं मिली, जिससे आने वाली पीढ़ियां जान सकें। पहले कबिलाई तरीके से रहे होंगे, लेकिन बदलते समय के साथ कृषि प्रमुख व्यवसाय इनका बना और अन्नदाता की पहचान बनाई। आजाद भारत में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में प्रमुखत: रहते हैं। महज आरक्षण आंदोलन से जाट की पहचान हो यह उचित नहीं, बल्कि आरक्षण आंदोलन से फिर एकजुट होकर दुनिया की नजरों में आई इस कौम का इतिहास शूरवीरों के बलिदानों से भरा है। हर साल 13 अप्रैल को बैशाखी पर विश्व जाट दिवस भी मनाया जाने लगा है। कृषि, व्यवसाय, खेल और सीमा पर सुरक्षा में अपनी बहादुरी के झंडेे गाड़ रहे जाट समाज के वीरों द्वारा जात-धर्म से ऊपर उठकर देश ...