एक दौर वो भी था...जब पडोसी तक की वोट की दे दी जुबान, नेता ने वादा कर दूसरे क्षेत्र में भी निपटवा दी समस्या
- पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने बताए राजनीतिक माहौल में बदलाव के किस्से जितेंद्र बूरा. गोहाना क्षेत्र के बिधल गांव में जन्मे एडवोकेट धर्मपाल मलिक ने 1977 में कांग्रेस पार्टी से गोहाना से एमएलए का चुनाव लड़ा। तीसरे स्थान पर रहे। 1984 में लोकसभा चुनाव में स्व. देवीलाल को शिकस्त देकर वे लोगों के बीच चर्चा में आ गए। देवीलाल लहर के दौरान 1989 में वे कपिल देव शास्त्री से हार गए लेकिन 1991 में फिर उन्होंने लोकसभा में कपिलदेव शास्त्री को हराया। 1996 में लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे। 2004 में लोकसभा में फिर धर्मपाल मलिक को टिकट दी और वे किशनसिंह सांगवान से हारे। 2005 में धर्मपाल मलिक गोहाना से विधायक बने। इसके बाद 2008 में उपचुनाव नहीं जीत पाए। इसके बाद इन्हें चुनाव नहीं लड़ा। पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक बताते हैं कि कैसे मतदाता जुबान के और नेता वादे के होते थे पक्के राजनीति में एक दौर था कि नेता वादे के पक्के और मतदाता जुबान के धनी होते थे। अब हालात यह हैं कि एक घर में अलग-अलग विचार हैं और तीन-तीन जगह वोट जाती हैं। आजादी से पहले हुए चुना...