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दूल्हा भट्टी ( दुल्ला सरदार ) की कहानी और लोहड़ी पर्व

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दूल्हा भट्टी ( दुल्ला सरदार )की कहानी ( लोहड़ी पर्व ) लोहड़ी पंजाब में मनाया जाने वाला पर्व है जो पंजाब से अलग हो चुके प्रान्तों जैसे हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में भी उसी उत्साह के साथ मनाया जाता है | इन प्रदेशों से आकर जो प्रवासी देश के विभिन्न भागों में बस गये हैं वहाँ भी ये लोग उसी उमंग और उत्साह के साथ इस पर्व को मनाते हैं | बच्चे घर-घर जाकर गीत गाते हुए लोहड़ी का उपहार माँगते हैं और बदले में लकड़ियाँ, मिठाई, गजक, रेवड़ी इत्यादि उन्हें दिये जाते हैं | देर शाम किसी सार्वजनिक स्थल पर सभी लोग एकत्रित होते हैं और लकड़ियों को जला कर उसके चारों तरफ परिक्रमा लगाते हुए गीत गाते हैं और जोश और उल्लास के साथ भांगड़ा और गिद्धा करते हैं | तिल, गुड़, मूंगफली, गजक, रेवड़ी और अन्य भुने हुए अनाज खाते भी हैं और सबको बाँटते भी हैं ! इस पर्व से जुड़ी हुई एक रोचक लोक कथा भी है जो दर्द भरी तो अवश्य है लेकिन हर सूरत में जन मानस का उत्साह बढ़ाने में कारगर है ! इस कथा का नायक है दूल्हा भट्टी | वाघा बॉर्डर से लगभग 200 किलोमीटर पार, पाकिस्तान के पंजाब में पिंडी भट्टियां है। वहीं लद्दी और फरीद के यहां 1547 में ...

यमुना की बदलती धारा से पनपे हरियाणा व यूपी के सीमा विवाद, सालों से लड़ी जा रही कब्जा पाने की लड़ाईयां

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1975 में हुए दीक्षित अवार्ड के अधिकतर पिलर हो चुके गायब, अब सीमा विवाद मिटाने के लिए दोबारा लगेंगे। सोनीपत की 32 किलोमीटर में दोनों तरफ के 46 गांवों की सीमा, युपी के किसानों पर आज भी 1500 एकड़ भूमि दबाने के आरोप सोनीपत से करनाल की सीमा तक लगे 464 सीमा पत्थरों में से महज 32 ही बचे हैं। अलग-अलग समय में 85 से अधिक किसानों कब्जा व हमला करने के आरोप में हो चुके मामले दर्ज जितेंद्र बूरा. यमुना की तलहटी पर बसे सोनीपत जिले के मनोली गांव के रामफल और शीतल अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके नाम 40 साल पहले सरकार ने सरप्लस योजना के तहत जमीन अलॉट की थी। समय के दौर में यमुना की धारा बदलती रही। अब खेतों की जमीन यमुना के उस पार उत्तर प्रदेश के बागपत की तरफ है। उत्तर प्रदेश के लोगों ने उस पर कब्जा किया है। रामफल का बेटा नरेश और शीतल का बेटा ओमप्रकाश अपनी जमीन को बोना तो दूर सही से देख तक नहीं पाए हैं। मनोली गांव के ही 50 परिवारों की करीब 200 एकड़ जमीन पर उत्तरप्रदेश के किसानों का कब्जा है। हरियाणा और यूपी का सीमा विवाद ऐसा है कि पिछले 12 साल से ये लोग अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। ...

छह बेटियों के बाद भी बेटा नहीं हुआ तो छोड़ गया पति, सोशलिस्ट युवाओं ने छह लाख जुटा भरा दो बेटियों का भात

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- हर्ष छिक्कारा टीम ने सोशल मीडिया पर की सहयोग की अपील तो जरूरतमंद परिवार के खाते में हर वर्ग के लोगों की दान राशि - 104 जरूरतमंद परिवारों की करवा चुके 4.15 करोड़ की इसी तरह सहायता जितेंद्र बूरा.   शिवानका गांव में एक कमरे के कच्चे घर में रह रही महिला को हालात के ऐसे थपेड़े लगे की पति को बेटे की बेटे की चाह में छह बेटियां पैदा हो गई। छोटी बेटी डेढ साल की भी नहीं थी कि पति उसे छोड़कर चला गया। परिजन भी दूर हो गए। शादियों में बर्तन सफाई कर गुजारा चलाने वाली महिला की खुद की दो बेटियां शादी लायक हुई। शादी का दिन आया तो धर्म के भाई बने विभिन्न वर्ग के युवाओं की कतार भात भरने के लिए दरवाजे पर थी। सोशलिस्ट हर्ष छिक्कारा ने सामाजिक सहयोग से युवाओं की टोली के साथ 6 लाख 5100 रुपए का भात भरा। गांव में छह बेटियों की साथ रह रही महिला के घर पर मंगल गीत गाए जा रहे थे। दो बेटियों की शादी थी लेकिन न पति साथ और न ही मायके से परिवार से भाई। फिर भी जब भात भरने की रस्म अदायगी होने लगी तो धर्म के भाई बने युवाओं की टोली दरवाजे पर पहुंच गई। मंगल गीतों के बीच तिलक और हाथों में लड्‌डू लेकर भात भरने की...

बिना गम के भी हैं मुंह बनाए, हंसोकड़ रहे हरियाणा को अब कौन हंसाए

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एक छोटा सा सलाम...हरियाणा के हास्य कलाकारों के नाम... जितेंद्र बूरा... एक बै फत्तू खेत म्ह रेडियो  सुणे था। रेडियो पै एक लुगाई बताण लाग री थी, बंबई मै बाढ़ आ गी, गुजरात मै हालण आग्या, दिल्ली म्ह… फत्तू नै देख्या पाच्छै नाका टूट्या पड़्या सै, अर पाणी दूसरे के खेत म्ह जाण लाग रहया सै। फत्तू छोंह म्ह आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या – दूर-दूर की बताण लाग री सै, लवै नाका टूट्या पड़या सै, यो बतांदे होए तेरा मुंह दुक्खै सै। हंसोकड़ हरियाणा में कुछ इसी तरह हर कदम हर बात में हास्य भरा था। नोहरा, बैठक हो या कहीं बैठी मंडली हो, हर जगह हंसगुल्ले थे। हरियाणा वालों को हाजिर जवाब माना जाता रहा। स्कूल, कॉलेजों के सांस्कृतिक मंचों से निकले हास्य कलाकारों ने सालों साल हमें हंसाया, गुदगुदाया। प्राचीन सांग परंपरा के नकली से लेकर 80 के दशक में चंद्रावल फिल्म के रूंडा-खूंडा के हास्य अभिनय ने ऐसी नींव डाली कि इसके बाद एक से बढ़कर एक हास्य कलाकार हमने दिए। समय की दौड़ में यू ट्यूब और सोशल मीडिया में घुसा यूथ व अन्य वर्ग अब ठहाकों से दूर हो रहा है। रंग मंचों पर कलाकारों की कमी खलने लगी है और युनिवर...

राजनीति पर खाप इफेक्ट : खापों को नहीं दी राजनीतिक दलों ने तवज्जो, पिछले चुनावों में कई खाप प्रधान लड़ चुके चुनाव

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राजनीति में खाप - -  जाट    बहुल्य    क्षेत्र    में    खापों    का    खासा    प्रभाव ,   राजनीतिक    दलों    के    समर्थन    में    भी    बंटी    खापें -  कई    खाप    राजनीति    से    रख    रही    सीधे    तौर   पर    दूरी ,  तो    महम    चौबीसी    ने    अपने    भी    उतारे    उम्मीदवार जितेंद्र   बूरा ... खापों   का   राजनीतिक में   हस्तक्षेप   बढ़ता   रहा   है, लेकिन इस बार राजनीतिक दलों ने खापों को खास तवज्जो नहीं दी है। टिकट की उम्मीद में बैठे और पिछली बार चुनाव तक लड़ चुके खाप प्रधानों को टिकट नहीं मिली। भाजपा ने पिछली बार चुनाव लड़ने वाले मलिक खाप प्रधान बलजीत मलिक, सांगवान खाप प्रधान सोमवीर सांगवान को टिकट नहीं दी। इनेलो से...