संदेश

हरियाणा में राजस्व विभाग की भाषा

राजस्व भाषा की जानकारी - 1 आबादी देह→ गॉंव का बसा हुआ क्षेत्र । 2 मौजा→ ग्राम 3 हदबस्त →त्हसील में गॉंव का सिलसिलावार नम्बर । 4 मौजा बेचिराग →बिना आबादी का गॉंव । 5 मिसल हकीयत→ बन्दोबस्त के समय विस्तारपूर्वक तैयार की गई जमाबन्दी । 6 जमाबन्दी→ भूमि की मलकियत व बोने के अधिकारों की पुस्तक । 7 इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश । 8 खसरा गिरदावरी→ खातेवार मलकियत,बोने व लगान का रजिस्टर । 9 लाल किताब →गॉंव की भूमि से सम्बन्धित पूर्ण जानकारी देने वाली पुस्तक । 11 शजरा नसब→ भूमिदारों की वंशावली । 12 पैमाईश →भूमि का नापना । 13 गज →भूमि नापने का पैमाना । 14 अडडा →जरीब की पडताल करने के लिए भूमि पर बनाया गया माप । 15 जरीब →भूमि नापने की 10 कर्म लम्बी लोहे की जंजीर । 16 गठठा →57.157 ईंच जरीब का दसवां भाग । 17 क्रम →66 ईंच लम्बा जरीब का दसवां भाग । 18 क््रास →लम्ब डालने के लिए लकडी का यन्त्र । 19 झण्डी →लाईन की सीधाई के लिए 12 फुट का बांस । 20 फरेरा→ दूर से झण्डी देखने के लिए बांस पर बंधा तिकोना रंग बिरंगा कपडा । 21 सूए →पैमाईश के लिए एक फुट सरिया । 22 पैमाना पीतल →म्सावी बनाने क...

जोहड़ पर दशहरे की शाम को छोरियों का सांझी तैराण का और छोरयां का लठ घुमाण का टेम ना रहा

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जितेंद्र बूरा.. पेंट से चमकती दीवार भी इस बार अपनी ओर ध्यान नहीं खींच रही है। नवरात्रों के नौ दिन बीते पर घर में अनोखे मेहमान की हाजिरी नहीं हुई। न हर दिन उसे खिलाने के लिए व्यंजन बने। अब दशहरे की शाम आ गई। रावण के पुतले जलाकर उत्साहित गांव के लोग घरों में मिठाई बांट रहे हैं। फिर भी न जानेे क्यों बहुत कुछ फीका है। अंधेरा छा गया है किसी की विदाई का महोत्सव नहीं है। तालाब पर सन्नाटा है और युवतियों आैर महिलाओं के गीतों की गूंज सुनाई नहीं दे रही। गांव के युवा छोरे घर पर ही मोबाइल फोन पर दशहरे की वीडियो शेयर कर रहे हैं। घर के दरवाजे के पीछे रखी दादा, पापा की लाठी आज भी एक जगह खड़ी सिसकियां ले रही है। उसे तो तालाब पर अपना करतब दिखाना था।  मैने भी होंसला कर ही लिया चलो मैं ही शुरुआत करता हूं। कोणे में रखी वो लाठी उठाई और चल दिया जोहड़ की ओर। तालाब का पानी अब गांव की गंदगी से मैला हो गया है। गांव वालोंं का घुसना तो दूर अब तो पशुओं को भी कम ही इसमें ले जाते हैं। चांद-तारों की चमक पानी पर जरूर है लेकिन दूर-दूर तक वो पानी में तैरती अनोखी आग नजर नहीं आ रही। किनारे बैठ यूं ही वे बचपन की यादे...

थोड़ी सी जै करें समझदारी, आंवे निकट ना कोई बीमारी

हफ्ता दस दिन म एक दो घंटा अपणे बूढ्या के गेल बैठ क देखो। जिंदगी का अनुभव बहोत किमे सिखा दे स...। पानी में गुड़ डालिए, बीत जाए जब रात! सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! *धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!* दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!! *ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!* कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!! *प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!* बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!! *ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!* करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाधार!! *भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!* चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!! * प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!* सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!! *प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!* तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!! *भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!* डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !! *घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!* एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!! *अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!* पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!! *रक्तचाप बढने लग...

जो शरीर न दिक्कत दे वो खाणा ठीक नही, गैर टेम बिराणे घर में जाणा ठीक नही

बड़े बुड्ढे कह गए सुथरी नार,, हाथ मे हथियार, एक तरफ़ा प्यार और फददू यार... ले कै # बैठण के हो सै। : कुछ काम की बात जो म्हारे दादे -परदादे बता कै गए सै... 1 . जो शरीर नै तंग करै वो खाणा ठीक नही वेवक्त घरां गैर के जाणा ठीक नही! 2 . जार की यारी, वेश्या का ठिकाणा ठीक नही ! ख़ुशी के टेम पै मातम का गाणा ठीक नही !! 3. बीर नै ज्यादा मुंह के लाणा ठीक नही ! बेटी हो घर की शोभा, घणा घुमाणा ठीक नही !! 4 पास के धन तै काम चालज्या तै कर्जा ठाना ठीक नही ! भाईचारे तै रहना चाहिए बेबात, गुस्सा ठाना ठीक नही !! 5 . सुसराड में जमाई, बेटी कै बाप और गाम मैं साला ठीक नही ! पछीत मैं बारना, घर के बीच मैं नाला ठीक नही!! 6 . ऐश करण नै माल बिराना ठीक नही   अर तिल हो धोले रंग का, दाल मैं क़ाला ठीक नही ! हरियाणा कै बुजरगौ की काहवत ऐकला छौरा, ऊट बै मौहरा, दुर का नौहरा {हमैशा तंग ही करै है} काश की कायरी, पुलिसए की यारी, गधै की सवारी {कभी भी धौखा दे सकती है} पछीत मै आला, आंख मै जाला, घर मै साला {हमेशा सेध्या करै} बीन बाजती, बीर नाचती,  कौयल कुकानंती {द...

हरियाणा में गाए गए 24 प्रसिद्ध सांग, हर रागणी में मिलता है जीवन का मर्म

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जितेंद्र बूरा... ले कै दे दे, कर कै खा ले, उस तै कौण जबर हो स। नूगरा माणस, नजर फेर ज्या, समझणिए की मर हो स। मतलब- किसी से लिया वापस दे देना, अपनी मेहनत करके खाना, उस व्यक्ति से अच्छा और कोई नहीं है।              चालाक आदमी समय आने पर दोस्ती व रिश्तेदारी भूल नजरें बदल जाता हैं, समाज में बस अच्छे बुरे की समझने वाले को ही परेशानी झेलनी पड़ती है। हरियाणा के शेक्सपियर कहे जाने वाले 1901 में सोनीपत के जाटी कलां में जन्में पं. लख्मीचंद कभी स्कूल नहीं गए लेकिन सूर्य कवि की उपाधि प्राप्त प्रदेश की इस महान शख्सियत के सांग और रागनियां पिछले 100 साल से उत्तर भारतियों के मनाेरंज के साथ प्रेरणा बनी हैं। 100 साल बाद भी भविष्य के हालात पर लिखे बोल समय के साथ सच साबित भी हो रहे हैं। 1945 में इस दुनिया से विदा हुए पं. लख्मीचंद ने 44 की उम्र तक 19 से अधिक सांग और हजारों रचनाएं दी। राजाराम शास्त्री ने सन् 1958 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'हरियाणा लोक मंच की कहानियां' में लिखा है कि लगभग सवा दो सौ वर्ष पूर्व जिस ज्योति को किशन लाल भाट ने प्रज्वलित किया, एक...

जींद रियासत के बटेऊ (दामाद) ने 1915 में ही देश के बाहर बना दी थी 'आजाद हिंद' सरकार! नोबेल के लिए हुए थे नॉमिनेट, अब इनके नाम से बनेगी यूनिवर्सिटी

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इतिहास के पन्नों में औझल देश की आजादी के भागीदार महान शख्सियत की गाथा..  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके नाम से यूनिवर्सिटी बनाने के लिए किया है शिलान्यास जितेंद्र बूरा.. हरियाणा के जींद जिले की जनता को भले ही आजादी के बाद वर्ष 1948 में जींद रियासत से आजादी मिली। लेकिन इसी रियासत के बटेऊ यानि दामाद ने 1915 में ही देश के बाहर आजाद हिंद सरकार! का गठन कर दिया था। यह थे वर्ष 1901 में  जींद नरेश महाराज रणवीर सिंह की छोटी बहन बलवीर कौर  से धूमधाम से शादी करने वाले उत्तर प्रदेश के हाथरस के हिंदू राजा महेंद्र प्रताप सिंह। 25 दिसंबर 2015 का दिन था। दुनिया क्रिसमस मना रही थी, भारत में वाजपेयी जी का जन्मदिन मनाया जा रहा था तो पाकिस्तान में जिन्ना के साथ-साथ नवाज शरीफ की सालगिरह। पीएम मोदी रूस से सीधे अफगानिस्तान के काबूल में पहुंचे। यहीं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह की तरीफ अपने भाषण में कर उनकी देश के प्रति भागीदारी को दोबारा दिलों में जगा दिया। इसके बाद  प्रधानमंत्री ने 14 सितंबर 2021 को अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर यूनि...

सावन की कोथली में बांधकर जाता शादीशुदा बेटियों के लिए प्यार

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कोथली बूड्ढी बैट्ठी घर के बाहरणे छोरी पतासे बाट्टण आई करले दादी मुह नैं मिट्ठा मेरी मां की कोथली आई बूड्ढी बोल्ली के खाउं बेट्टा घर की बणी या चीज कोन्या सारे त्योहार बाजारु होगे ईब पहले आली तीज कोन्या कोथली तो वा होवै थी जो म्हारे टैम पै आया करती सारी चीज बणा कै घरनै मेरी मां भिजवाया करती पांच सात सेर कोथली मैं गुड़ की बणी सुहाली हो थी गैल्या खांड के खुरमें हो थे मट्ठी भी घर आली हो थी सेर दो सेर जोवे हों थे, जो बैठ दोफारे तोड्या करती पांच सात होती तीळ कोथली मैं जो बेटी खातर जोड़्या करती एक बढिया तील सासू की, सूट ननद का आया करता मां बांध्या करती कोथली मेरा भाई लेकै आया करता हम ननद भाभी झूल्या करती झूल घाल कै साम्मण की घोट्या आली उड़ै चुंदड़ी लहर उठै थी दाम्मण की डोलै डोलै आवै था भाई देख कै भाज्जी जाया करती बोझ होवै था कोथली मैं छोटी ननदी लिवाया करती बैठ साळ मैं सासू मेरी कोथली नैं खोल्या करती बोझ कितना सै कोथली मैं आंख्या ए आंख्या मैं तोल्या करती फेर पीहर की बणी वे सुहाली सारी गाल मैं बाट्या करती सारी राज्जी होकै खावैंथी कोए भी ना नाट्या करती ...