बिना गम के भी हैं मुंह बनाए, हंसोकड़ रहे हरियाणा को अब कौन हंसाए

एक छोटा सा सलाम...हरियाणा के हास्य कलाकारों के नाम...

जितेंद्र बूरा...

एक बै फत्तू खेत म्ह रेडियो  सुणे था। रेडियो पै एक लुगाई बताण लाग री थी, बंबई मै बाढ़ आ गी, गुजरात मै हालण आग्या, दिल्ली म्ह… फत्तू नै देख्या पाच्छै नाका टूट्या पड़्या सै, अर पाणी दूसरे के खेत म्ह जाण लाग रहया सै। फत्तू छोंह म्ह आकै रेड़ियो कै दो लट्ठ मारकै बोल्या – दूर-दूर की बताण लाग री सै, लवै नाका टूट्या पड़या सै, यो बतांदे होए तेरा मुंह दुक्खै सै।

हंसोकड़ हरियाणा में कुछ इसी तरह हर कदम हर बात में हास्य भरा था। नोहरा, बैठक हो या कहीं बैठी मंडली हो, हर जगह हंसगुल्ले थे। हरियाणा वालों को हाजिर जवाब माना जाता रहा। स्कूल, कॉलेजों के सांस्कृतिक मंचों से निकले हास्य कलाकारों ने सालों साल हमें हंसाया, गुदगुदाया। प्राचीन सांग परंपरा के नकली से लेकर 80 के दशक में चंद्रावल फिल्म के रूंडा-खूंडा के हास्य अभिनय ने ऐसी नींव डाली कि इसके बाद एक से बढ़कर एक हास्य कलाकार हमने दिए। समय की दौड़ में यू ट्यूब और सोशल मीडिया में घुसा यूथ व अन्य वर्ग अब ठहाकों से दूर हो रहा है। रंग मंचों पर कलाकारों की कमी खलने लगी है और युनिवर्सिटी तक को कॉलेज स्तर पर कम भागीदारी पर यूथ फेस्टिवल जैसे उत्सवों को छोटा या बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। बदलते हरियाणा की यह बड़ी चुनौती है। हरियाणा से हास्य गया तो समझो बढ़ते क्राइम, नशा और घरेलू दुखों में घिरे लोग अंदर ही अंदर घुटेंगे और कम उम्र में बीमारियों का शिकार होंगे। 
कुछ देर की पागल पंथी ही सही, हंस लिजिए...मौका है यही।





अस्सी के दशक की मशहूर हरियाणवी फिल्म चंद्रावल में रूंडा खुंडा कॉमेडियन की भूमिका निभाने वाला खुंडा यानि पानीपत के उग्राखेड़ी गांव के दरियाव सिंह मलिक अब हमारे बीच नहीं हैं। कुछ साल पहले ही
उन्होंने अपनी 17वीं फिल्म के तौर पर यशराज चोपड़ा की हिंदी फिल्म 'मेरे डैड की मारुति' में हास्य अभिनय किया। हरियाणवी मखौल में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। हास्य कलाकार दरियाव सिंह मलिक ने कहा था कि उन्हें इस बात का दुख है कि हरियाणवी संस्कृति विलुप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों में हरियाणवी संस्कृति अथवा बोली की अधिक मांग हैं। यहां सार्वजनिक हास्य अब कम हो रहा है और यू टयूब पर कुछ नए कलाकार छोटी-छोटी वीडियो बनाकर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। हरियाणवी मशहूर गायक गजेंद्र फौगाट ने उनका लाइव इंटरव्यू भी किया था।


हरियाणवी फिल्मों से लेकर रंगमंचों पर खूब चला हास्य का जादू
जींद और पुराने रोहतक जिले ने प्रदेश को सबसे ज्यादा हास्य कलाकार दिए। चंद्रावल फिल्म की अपार
सफलता के बाद हरियाणवी फिल्मों की बहार आई और कॉमेडियन छाए रहे। एक दौर तक पं. लख्मीचंद, फौजी मेहरसिंह, पं. जगन्नाथ सरीखे कवियों के सांग के बीच हास्य सुनने वाले हरियाणा ने फिल्मों में हास्य देखना शुरू किया। सतीश कौशिक जैसे कलाकारों ने बालीवुड में धूम मचाई। स्कूलों की बाल सभाओं, कॉलेजों के यूथ फेस्टिवल में सास्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच हास्य
कलाकारों की धमक बढ़ने लगी। इन्हीं मंचों से निकल कर जींद जिले से राममेहर रांडा, महावीर गुड्‌डू, सतीश हरियाणवी, जगबीर राठी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में ऐसे हास्य कलाकार तैयार हुए जिन्होंने हरियाणा की हर जुबां पर हास्य भर दिया। रागनी कंपीटिशन गांव-गांव होने लगे और आजाद सिंह, सुनील जुजानिया, रणबीर सिंह, पासी नय्यर, बाली शर्मा, राजबाला सहित अन्य गायकों ने रागनियों में हास्य चुटकुलों से गुदगुदाना शुरू किया। टैप रिकॉर्डर की कैसेट के दौर में महाबीर गुड्‌डू ने अपने चुटकुलों की कैसेट निकाली। राममेहर रांडा ने गब्बर फंसग्या रांड्या कै। मास्टरणी, बटेऊ सुसराड़ मैं, देशी पुलिस चौकी जैसे अनेक किस्से कैसेट के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाए। हालांकि हास्य में फुहड़ता और अश्लील पुट शामिल होने का विरोध भी होता रहा।
सीडी फिल्म ने हास्य व्यंग्य में दिखाई सामाजिक बुराइयां
दौर बदला तो वर्ष 2000 के समय सीडी प्लेयर आ गए। एक से डेढ घंटे की वीडिया फिल्म बनने लगी। इस
दौरा में राजेश सिंगपुरिया, नरेंद्र बल्हारा जैसे कलाकारों ने हरियाणवी संस्कृति में घुस रही बुराइयों पर कटाक्ष करती वीडियो फिल्म सीडी के माध्यम से परोसी। इनमें हास्य, संगीत और अभिनय का संगम किया और हर घर तक पहुंच बनाई। भाई भाई का बंटवारा, सास बहू की लड़ाई, बेटी शराबी की जैसे नाटक से नरेंद्र बल्हारा ने पहचान बनाई। राजेश सिंगपुरिया की संदूक में बंदूक गीत और सीडी ने नया धमाल मचा दिया। महिला कलाकारों ने छाप छोड़ी। रोचकता बढ़ी तो छोटे-छोटे कस्बों के कलकार भी हरियाणवी नाटक की सीडी निकालने लगे।
मोबाइल क्रांति ने दिया यू ट्यूबिया हास्य
मोबाइल क्रांति के बाद हरियाणा में हास्य यू टयूबिया हो गया। इंस्टाग्राम वीडियो में बदल गया। झंडू,
महावीर गुड़डू, जगबीर राठी जैसे कलाकार आज भी सार्वजनिक मंच पर हास्य को आगे बढ़ाने में लगे हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच ही कम होते चले गए। मोबाइल में यूथ घुसकर मौन और अंदरुनी हंसी वाला होता जा रहा है। मोबाइल में घुसे लोगों को भी हंसाने के प्रयास शुरू हुए। यू ट्यूब पर हंसाने की परंपरा की शुरुआत हरियाणा से निकल विदेश के मेलबर्न में रह रहे विकास श्योरण व रीतू श्योराण दंपत्ती ने की। झज्जर के विदेश में पढ़े ललित शोकिन ने यू ट्यूब हास्य को यूथ पुट देकर नया रंग दिया। सोनीपत के मुकेश दहिया ने
कुणबा धर्मे का सीरिज शुरू कर हरियाणवी कल्चर को नई ऊंचाई व हास्य दिया। जींद में हाट गांव के युवाओं ने एंडी छोरे के नाम से वीडियो बनाने शुरू किए तो दीपक भारद्वाज सत्ता के तौर पर और देवेंद्र बिनड़ गांव के  बनिया रामधन के तौर पर चर्चित हो गए। स्वादू स्टफ के युवाओं के अलावा पूजा खटकड़, आशु चौधरी व अन्य महिला कलाकारों ने हास्य के नए रंग भरे।
ऐसे तो बंद हो जाएंगे यूथ फेस्टिवल व कलाकार पैदा होने
प्रदेश में पहले कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी के अधीन सभी कॉलेज होते थे या रिजनल सेंटर बने थे। क्षेत्र अनुसार यूथ फेस्टिवल होते रहे। फिर रिजनल सेंटर हिसार, जींद, रोहतक व अन्य जिलों में युनिवर्सिटी में बदल गए। कॉलेज इनमें बांट दिए गए। हाल ही में सोनीपत के टीकाराम कॉलेज में एमडीयू ने जोनल यूथ फेस्टिवल करवाया। 22 कॉलेजों की भागीदारी इसमें होनी थी लेकिन कॉलेज प्रबंधनों ने दिलचस्पी नहीं ली। हर इवेंट में मुश्किल से तीन या चार प्रतिभागिताएं हुई। यहां पहुंचे एमडीयू के युवा कल्याण विभाग निदेशक व मशहूर कलाकार जगबीर राठी ने यह तक कहना पड़ा कि अगली बार कॉलेजों में नहीं यूथ फेस्टिवल युनिवर्सिटी में ही होगा। 
हंसते रहिए, कहीं आपको रोना न आ जाए...
आज के दौर में मखौलिया बनना आसान नहीं है। छोटी-छोटी बात चुभ जाती हैं। लेकिन प्रदेश का हास्य और
खुशहाली मुखौलियापन में ही है। हास्य कलाकारों के लिए नए-नए प्लेटफार्म देने होंगे। यू ट्यूब वीडियाे से कलाकार तो पैदा हो रहे हैं लेकिन सामूहिक और सार्वजनिक हास्य विलुप्त होता जा रहा है। हंसते रहिए, कहीं आपको रोना न आ जाए...।
- जगबीर राठी, हास्य कलाकार व निदेशक युवा कल्याण विभाग एमडीयू।
हमने हंसते-हंसाते उम्र बिता दी, अब जिम्मेदारी ले नई पीढ़ी
पिता खेत में हल चलाते थे तो हम पढ़े भी और हास्य व हरियाणवी कला को आगे बढ़ाते भी चले गए। नौकरी के दौरान भी हास्य को बरकरार रखा। सुख-दुख हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन हमने हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के प्रयास किए। उम्र का एक बड़ा पड़ाव देख चुके हैं। अब नई पीढ़ी को हास्य की जिम्मेदारी लेनी होगी।
- महावीर गुड्‌डू, हरियाणवी हास्य कलाकार

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